क्या जाने मैं ढूँढता हूँ..........
..........इक बुझी सी राख में
मिल जाए कोई ख्वाहिश........
...जल चुके अरमानो की ख़ाक में
ज़िन्दगी के सेहरा में खो गया हूँ इस कदर
की वापस चलता हूँ कुछ पड़ाव...
.... अपनी पहचान की तलाश में
क्या जाने मैं ढूंढता हूँ........
.......सन्नाटे के हर पयाम में
ढूंढता हूँ मैं तरन्नुम.........
.........खामोशी के बाज़ार में
हो गयी है अब खामोशियों की आदत इस कदर
की सुन रहा हूँ अब हर आहट....
.....अपनी आवाज़ की तलाश में
क्या जाने मुझे मिलता है......
..दर्द के बीच भी उस मुस्कान में
है यही तो वो इंसानी जज्बा....
.....जी रहा हूँ जिसकी आस में
वर्ना दुनियावालों ने तो मिटा दी है मेरी शख्शियत इस कदर
की भीड़ से रोज़ गुज़रता हूँ....
....खुद को पाने की तलाश में
-------------------------------------------- नीलाभ
--Expressions: This poem was written just to introspect about some beautiful feelings that came to me, or went away from me in this wonderful journey called........ life.
सेहरा = desert
पयाम = message
तरन्नुम = melody
Expressions...... These poems are an attempt just to give words to all my thoughts that have touched me at some point of time .......
Friday, April 2, 2010
Friday, March 26, 2010
कामयाबी....
कामयाबी की कीमत न पूछ उससे.....
जिसके क़दमों में ये रहती है हरदम
गर जाननी है इसकी अहमियत......
तो जान उससे जिसे है अपनी नाकामयाबी पे ग़म
गर जानना है की है फ़तेह क्या....
तो न पूछ उससे जो जीत के नशे में है मस्त
देख उस चहरे को....
जिसे मिली है मैदान-ऐ-जंग में शिकस्त
जीत की धुन उसके लिए सुख नहीं लाती....
हर सुरीली तान है उसके ज़ख्म हरे कर जाती
हर ख़ुशी उसकी हार है याद दिलाती....
हर दीवाली है उसके अरमानों को जलाती
हर बारिश है उसकी आँखों से नीर बहाती....
हर पल है वो जुड़ कर फिर से टूटता
पिछला कुछ वो चाह कर भी नहीं भूल पाता....
क्योंकि जीवन के हर मोड़ पे वो लोगों को है खुद पे हंसता पाता
ख़्वाबों की अहमियत न पूछ उससे....
जो इन्हें है पूरे होते देखता
गर जाननी है इनकी अहमियत.....
तो जान उससे जो टूटे ख़्वाबों के साथ है जीता
-------------------------------------------- नीलाभ
--Expressions: Depicts what victory is from perspective of a person who has struggled all his life for the same and yet lost it.
--This was one among my first poems written which was inspired, adapted and quite a lot translated from one of favourite poems "Success is counted Sweetest..." by Emily Dickinson.
जिसके क़दमों में ये रहती है हरदम
गर जाननी है इसकी अहमियत......
तो जान उससे जिसे है अपनी नाकामयाबी पे ग़म
गर जानना है की है फ़तेह क्या....
तो न पूछ उससे जो जीत के नशे में है मस्त
देख उस चहरे को....
जिसे मिली है मैदान-ऐ-जंग में शिकस्त
जीत की धुन उसके लिए सुख नहीं लाती....
हर सुरीली तान है उसके ज़ख्म हरे कर जाती
हर ख़ुशी उसकी हार है याद दिलाती....
हर दीवाली है उसके अरमानों को जलाती
हर बारिश है उसकी आँखों से नीर बहाती....
हर पल है वो जुड़ कर फिर से टूटता
पिछला कुछ वो चाह कर भी नहीं भूल पाता....
क्योंकि जीवन के हर मोड़ पे वो लोगों को है खुद पे हंसता पाता
ख़्वाबों की अहमियत न पूछ उससे....
जो इन्हें है पूरे होते देखता
गर जाननी है इनकी अहमियत.....
तो जान उससे जो टूटे ख़्वाबों के साथ है जीता
-------------------------------------------- नीलाभ
--Expressions: Depicts what victory is from perspective of a person who has struggled all his life for the same and yet lost it.
--This was one among my first poems written which was inspired, adapted and quite a lot translated from one of favourite poems "Success is counted Sweetest..." by Emily Dickinson.
Subscribe to:
Posts (Atom)